Touch the screen or click to continue...
Checking your browser...
emuamber.pages.dev


Krishna bihari noor biography of william

          Buy Krishna Bihari 'Noor' Books Online By Krishna Bihari 'Noor' from Upto 50% Off 30 Day Replacement Guarantee Free Shipping Cash On....

          कतरा वही है जिसमें कि दरिया दिखाई दे- कृष्ण बिहारी 'नूर'

          Agency:News18Hindi

          Last Updated:

          कृष्ण बिहारी 'नूर' के तीन संग्रह "दुःख-सुख", "तपस्या" उर्दू में और "समन्दर मेरी तलाश में है" देवनागरी में प्रकाशित हुए.

          उनकी नज्मों में गंगा - जमुनी तहजीब की झलक साफ-साफ दिखाई देती है.

          कृष्ण बिहारी नूर 8 नवंबर, 1925 को लखनऊ में हुआ था.

          The Title is Aaj Ke Prasidh Shayar - Krishna Bihari 'Noor'.

        1. Kabiris said to have been born of Hindu parents and adopted by Muslim weavers, yet we dont know his religion and he is revered by all Indians.
        2. Buy Krishna Bihari 'Noor' Books Online By Krishna Bihari 'Noor' from Upto 50% Off 30 Day Replacement Guarantee Free Shipping Cash On.
        3. He propagated the ethos of secularism and wrote verses in praise of Lord Krishna ('Paigam-e-hayaatjaavedan tha; har nagma-e-Krishna baansuri ka'.
        4. He was born and raised in Chandigarh, where he completed his education.
        5. भारत के उर्दू शायरों में कृष्ण बिहारी ‘नूर’ एक मशहूर नाम हैं. उन्होंने शायरी को बड़ी ही नफ़ासत के साथ खूबसूरत लफ्जों में ढाला है. उर्दू के अशरार को उन्होंने बेहद ही सुन्दर ढंग से कलमबंद किया है. प्रस्तुत हैं उनकी चुनिंदा गज़ल-

          नजर मिला न सके उससे उस निगाह के बाद
          वही है हाल हमारा जो हो गुनाह के बाद

          मैं कैसे और किस सिम्त मोड़ता खुद को
          किसी की चाह न थी दिल में, तिरी चाह के बाद

          ज़मीर कांप तो जाता है, आप कुछ भी कहें
          वो हो गुनाह से पहले, कि हो गुनाह के बाद

          कहीं हुई थीं तनाबें तमाम रिश्तों की
          छुपाता सर मैं कहां तुम से रस्म-ओ-राह के बाद

          गवाह चाह रहे थे, वो मिरी बेगुनाही का
          जुबां से कह न सका कुछ, ‘ख़ुदा गवा