Krishna bihari noor biography of william
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कतरा वही है जिसमें कि दरिया दिखाई दे- कृष्ण बिहारी 'नूर'
Agency:News18Hindi
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कृष्ण बिहारी 'नूर' के तीन संग्रह "दुःख-सुख", "तपस्या" उर्दू में और "समन्दर मेरी तलाश में है" देवनागरी में प्रकाशित हुए.
उनकी नज्मों में गंगा - जमुनी तहजीब की झलक साफ-साफ दिखाई देती है. कृष्ण बिहारी नूर 8 नवंबर, 1925 को लखनऊ में हुआ था.The Title is Aaj Ke Prasidh Shayar - Krishna Bihari 'Noor'.
भारत के उर्दू शायरों में कृष्ण बिहारी ‘नूर’ एक मशहूर नाम हैं. उन्होंने शायरी को बड़ी ही नफ़ासत के साथ खूबसूरत लफ्जों में ढाला है. उर्दू के अशरार को उन्होंने बेहद ही सुन्दर ढंग से कलमबंद किया है. प्रस्तुत हैं उनकी चुनिंदा गज़ल-
नजर मिला न सके उससे उस निगाह के बाद
वही है हाल हमारा जो हो गुनाह के बाद
मैं कैसे और किस सिम्त मोड़ता खुद को
किसी की चाह न थी दिल में, तिरी चाह के बाद
ज़मीर कांप तो जाता है, आप कुछ भी कहें
वो हो गुनाह से पहले, कि हो गुनाह के बाद
कहीं हुई थीं तनाबें तमाम रिश्तों की
छुपाता सर मैं कहां तुम से रस्म-ओ-राह के बाद
गवाह चाह रहे थे, वो मिरी बेगुनाही का
जुबां से कह न सका कुछ, ‘ख़ुदा गवा